Lucknow: लखनऊ में करंट लगने की वजह से दोनों हाथ गंवा चुके 22 वर्षीय नीरज यादव के लिए नई उम्मीद की किरण सामने आई है। आर्थिक तंगी के कारण नीरज लंबे समय से प्रोस्थेटिक यानी कृत्रिम हाथ नहीं लगवा पा रहे थे। अब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी KGMU के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग की पहल से उन्हें निशुल्क कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक नीरज यादव का संपर्क KGMU के पीएमआर विभाग से हुआ था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके लिए कृत्रिम हाथ लगवाना मुश्किल था। इसके बाद विभाग ने इनर व्हील क्लब और एक स्वयंसेवी संस्था के सहयोग से करीब 9500 रुपये जुटाए और नीरज के लिए कृत्रिम हाथ की व्यवस्था की गई। बताया गया कि नीरज को यह कृत्रिम हाथ निशुल्क उपलब्ध कराया गया है।
KGMU की इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को आधुनिक पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे किसी पर पूरी तरह निर्भर न रहें और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को दोबारा व्यवस्थित कर सकें। कृत्रिम हाथ मिलने के बाद नीरज को इसके संचालन और इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इसके साथ ही उन्हें रोजमर्रा के काम और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पीएमआर विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को आधुनिक पुनर्वास सेवाएं देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रयास में संस्थान, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग भी महत्वपूर्ण है। नीरज के लिए यह पहल उनके जीवन में नई शुरुआत का जरिया बन सकती है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सकती है।
